उत्तराखंड जन विकास सहकारी समिति

“उत्तराखंड बचाओ टीम “ पहाड़ी क्षेत्र में हमारे लोगों को स्वरोजगार करने में मदद करना चाहत़ी है,उस़ी को हालसि करने के लिए उन्होंने “उत्तराखंड जन विकास कॉपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड” का गठन किया है जो उत्तराखंड में पंज़ीकृत है। उत्तराखंड बचाओ टीम,सहकारी समिति के माध्यम से,पहाड़ी क्षेत्र के लोगों को आवश्यक मदद जैसे आर्थिक मदद,उनकी पररयोजनाओं की तेज़ी से मंजूरी,प्रशिक्षण और मार्गदर्शन आदि प्राप्त करने में सक्षम होग़ी।

‘उत्तराखंड जन विकास सहकारी समिति’ उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र के लोगों को आत्म निर्भर बनाने में मदद करेग़ी तथा उत्तराखंड के विभिन्न समस्याओं को संभोधित करने का मचं है। सिमिति का मानना है की बदलाव प्रकृति का नियम है। समय हमारी चेतना का विस्तार है। बदलाव की छटपटाहट को समझना और उसके अनुरूप अपना मुकाम बनाना ही चेतन समाज की विशेषता है। विचारोंमें जड़ताविकास का रास्ता रोकती है। संचार के मौजूदा युग में बहुत कुछ बदला है। भूमंडलीकरण के दौर में दुनियाबहुतछोटी हो गयी है। अब हमारे लिए दुनिया के किसी हिस्से को जानना कठिन नहीं रहा। इस तरह का बदलाव सकारात्मक भी हो सकता है और नकारात्मक भी। यह हमारी चेतना पर निर्भर करता है की हम किस तरह बदलती परास्थितियों के लिए अपने कोतैयार करें। भूमंडलीकरण ने दुनिया को एक बड़े बाजार के रूप में स्थापित किया है। इस बाजार में सबसे ज्यादा खतरे अंचलिकता के साथ हैं। भारत जैसा देश जिसे हम बहुलता में समाई संस्कृतियों,भाषा बोलियां,विभिन्न भौगोलिकपारिस्थितिया,खान-पान आदि में अलग होने के बाद भी एकरूपता में देखते हैं,उसका यह रूप भी हमें एक-दूसरे को समझने और उनके परिवेश को आत्मसात करने की शक्ति से मिला है। यह समय के साथ और मजबूत हो रहा है। बढ़ता गया है। समृद्ध होता गया है। एक नदी की प्रवाह की तरह। संस्कृतियों की अक्षुण्णता प्रवाह में ही है। रुकने में नहीं। समाज भी जब तक प्रवाहमय रहेगा उसमें चीजें जुड़ती रहेंगी।

‘उत्तराखंड जन विकास सहकारी समिति’उस बड़े समूह को संगठित करने की पहल कर रहा है जो पहाड़ को सकारात्मक सोच के साथ बसाना औरबचाना चाहता है। इस आंदोलन का सूक्त वाक्य है- ‘सहकारिता,सहभागिता,सकंल्प और संदेश।’ हम सोचते हैं की पहाड़ की विषम परिस्थितियों औरसीमित संसाधनों के बीच जिन लोगों ने गावं में रहकर अपनी खेती-स्वरोजगार को अपनी आर्थिक का आधार बनाया है उन्हें प्रोत्साहन मिले| प्रवास में जन्में,पढ़े और बढ़े उन युवाओं को भी इस आंदोलन का हिस्सा बनाया जायेगा जिनका,आई टी,सिनेमा,रंगमंच,संगीत,कला,पत्रकारिता,अध्यापन,वैज्ञानिक ,चिकित्सक,प्रशासनिक अधिकारी,सेना,खेल आदि में प्रभावी हस्तक्षेप है। राष्ट्रीय ओर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई युवाओं नेविशेष उपलब्धियांभी हासिल की हैं। ये युवा पहाड़ में अपनी जड़ों को तलाशने के अलावा यहां के लिए कुछ न कुछ कर रहे हैं। जीतने भी लोग प्रवास में रह रहे हैं उनकी विशेषता और अनुभव का लाभ हमारे गांवों को मिले।