‘उत्तराखंड जन विकास सहकारी समिति’ के उद्देश्य

1. स्वरोजगार में मदद

पहाड़ की सबसे बड़ी समस्या रोजगार है। रोजगार की तलाश में युवा यहां से बाहर जाता रहा है। उत्तराखंड में खेती, पशुपालन, फलोत्पादन,पर्यटन और वन आधारित उद्योग स्वरोजगार का साधन रहे हैं। ‘उत्तराखंड बचाओ आंदोलन’ इसे बहुत प्राथमिकता के साथ लेता है। युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए हर तरह की मदद संस्था करेगी। सराकर द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के बारे में सही जानकारी देने का प्रयास किया जायेगा। स्वरोजगार के लिए युवाओं को तैयार करने के लिए समयसमय पर शिविर लगाये जाएगे। इन शिवरों में सरकारी अधिकारियों के अलावा उन व्यक्तियों को भी बुलाया जायेगा, जिन्होंने अपने उद्यम लगाकर रोजगार सृजन किया है। सरकारी योजनाओं का लाभ युवाओं को मिले इसके लिए हरस्तरपर संस्था काम करेगी। जो युवा आर्थिक अभाव के कारण अपना छोटा-मोटा काम शुरू नहीं कर पा रहे हैं, उन्हें परशिक्षणदिलाकर आर्थिक सहयता के साथ स्वरोजगार करने को प्रेरितकिया जायेगा। जो लोग पहले से ही स्वरोजगार कर रहे हैं उनके उत्पादों को बाजार प्रदान करने की पहल की जायेगी।

उत्तराखंड में स्वरोजगार की बहुत संभावनायें हैं। यहां के परंपरागतकुटीर उद्योगों से लेकर पशुपालन, मछली पालन, कुक्कुट पालन, मौन पालन, मशरूम की खेती, फूलों की खेती, हर्बल की खेती,स्थानीय उपजों और फलों पर आधारित उद्योग,होटल, होम-स्टे, पर्यटन के अलावा कई तरह की बेमौसमी सब्जियां, दालें और अन्य उपजें हैं, जिन्होंने बहुत तरीके से रोजगार में बदला जा सकता है। इसके लिएसरकारी स्तर पर तो योजनायें हैं ही कई और फंडिंगएजेंसीया भी सहयोग करती है। कई बड़े संस्थानों के सीएसआर फंड भी इसे बढ़ाने में मदद करते हैं। ‘उत्तराखंड जन विकास सहकारी समिति’ इन सबके लिए युवाओं को स्वरोजगार के लिए मदद करेगी। इस माध्यम से न केवल स्वरोजगार को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि‘रिवर्स पलायन’का माहौल भी बनेगा।

2. जनचेतना की पहल

‘उत्तराखंड बचाओ आंदोलन’उत्तराखंड में जनचेतना के माध्यम से पहाड़ के सांस्कृतिक, सामाजिक, स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वरोजगार और विकास के सवालों को जनता के बीच रखेगा। इसमें उन तमाम लोगों को शामिलकिया जायेगा जो इन विषय के विशेषज्ञ हैं। सरकारी स्तर पर चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी गांव के हर व्यक्तितक पहुंचे इसके लिए‘उत्तराखंड बचाओ आंदोलन’समय-समय पर कार्यक्रमआयोजितकरतीहै और आगे भी करती रहेगी ! जनता के अनुभवों और उनकी आकांक्षाओं के अनुरूप सरकार तक बात पहुंचाई जाये इसके लिये प्रयास किये जायेंगे। लोगों में जनचेतना के लिएसेमिनार, गोष्ठीय, पद-यात्रायें, रिपोर्ट,शोध आदिकिये जायेगे। समय-समय पर पोस्टर,कलेंडर, सीडी, डॉक्यूमेंटरी, फिल्म,रंगमचं,नुकड़ नाटाक, सांस्कृतिक आयोजन, प्रतियोर्गिाएं आदि के माध्यम से जनचेतना का काम किया जायेगा।

3. शिक्षा के प्रति जागरूकता एवं सहायता

उत्तराखंड के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में ‘उत्तराखडं बचाओ आंदोलन’बच्चों के स्वर्गीण लिए के लिए काम करेगा। हाईस्कूल और इंटरमिडीएट के छात्रों को समय-समय पर ‘करियर काउंसलिंग’ और ‘मोटिवेशन क्लासेस’ लेकर जागरूक करने का काम करेगा।प्रतिष्ठित और उच्च शिक्षणसंस्थानों के शिक्षक के माध्यम से छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के बारे में जानकारी दी जायेगी। आर्थिक संसाधनों के अभाव में जो बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं उनके लिए काम करना। उन बच्चों की सहयता करना जो आर्थिक कारणों से किसी अच्छे संसाधनों में दाखिला लेने से वंचित रह जाते हैं। जरूरतमंद छात्रों के लिएपुस्तक,स्टेशनरी,ड्रेस, ट्रेक सूट,जूते आदि की व्यवस्था करना। विकलांग, दृष्टिहीन या मानसिक रूप से कमजोर बच्चों की शिक्षा का प्रबंध करना।

4. स्वस्थ जागरूकता एवं सहायता

पहाड़ में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकिा बड़ा सवाल है। लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जनचेतना जगाने के लिएशिवरों का आयोजन किया जाएगा। जगह-जगह निशुल्क स्वास्थ्य शिवरों का आयोजन जायेगा। उन संस्थाओ से मदद ली जायेगी जो स्वास्थ्य के क्षेत्र में जनसेवा का काम कर रहे हैं। लाइलाज बीमारियो से ग्रसित लोगों उन लोगों की मदद करना जो आर्थिक अभाव में इलाज नहीं कर पाते हैं। विकलांगों के लिए आवश्यक उपकरण,बुजुर्गों और जरूरतमंदों को चश्मा-कान की मशीन आदि की व्यवस्था करना। ऐसे रोगियों के लिए समय-समय पर स्वास्थ्य शिवर लगाना जो मानसिक रूप सेअवसादग्रस्त हैं। उन्हें उचित स्वास्थ्य सेवायें प्रदान करना। स्वास्थ्यविभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाना।

5. जल जंगल ओर जमीन के सवाल

‘उत्तराखंड बचाओ आंदोलन’पहाड़ के उन सभी सवालों को संबोधित करेगा जिनसे वहां के लोग हमेशा पेरशान रहते हैं। संस्था का मनना है की प्राकृतिक संशधनों में पहला अधिकार स्थानीयलोगों का हो। उत्तराखंड में तेजी के साथ कम हो रहीकृषिभूमि को रोकने के लिए हम उत्तराखडं में ठोस भूमि कानून की मांग करते हैं। ‘उत्तराखंड बचाओ आंदोलन’ चाहता है की राज्य में ऐसा भू-कानून बने, जिसमे कोई कृषि जमीन को खदीद-बेच न सके। राज्य में जमीनों की पैमाइश होनी चाहिए। भूमिहीन और दलितों को भी जमीन मिलनी चाहिए। पूवोत्तर राज्यों के भूमि काननू और हिमाचल के भूमि कानून की धारा-118 की तर्ज पर हमारे यहां कानून बने। वन कानूनों ने जिस तरह गांव के लोगों को उनके अधिकारों से वंचित रखा है वे बहाल किये जाने चाहिए। वन उपजों और वन संपदा पर ग्रामीणों को हक मिलनाचाहिए। नदियों और पानी पर पहला अधिकार ग्रामीणों का हो। नदी आधारितपरियोजनाओ पर बड़ी जल विंदयुत परियोजनाए बनाने के बजाय छोटी और मझौली परियोजनाये ग्राम पंचायतों या सहकारिता के आधार पर हों, इसके लिए भी ‘उत्तराखडं बचाओ आंदोलन’काम करेगा।

6. महिलाओ ओर युवाओ के लिए कार्य

उत्तराखंड जन विकास समिति’महिलाओ और युवाओं के सवालों को प्रमुखता से उठाना चाहती है। इन दोनों के बिना हम पहाड़ की कल्पना नहीं कर सकते। पहाड़ आज बचा है तो महिलाओ के कारण। युवाओं को पहाड़ में रोकना बहुत जरूरी है। इसके लिएसंस्था महिलाओ को उनके अधिकारों के प्रति चेतना के लिए काम करेगी। महिलाओ को उनके कष्टों से निजात मिले उसके लिए सरकारी स्तर पर उनके उत्थान के लिए चल रही योजनाओं का लाभ मिले यह सुनिचितकिया जायेगा। महिलाओ की शिक्षा, उनके उत्थानऔर उन्हें मुख्यधारा में प्रतिनिधित्व मिले इसके लिए संस्था काम करेगी। महिलाओ को परंपरागतसमाजिक संरचना से बाहर लाकर उनकी प्रतिभा का सही उपयोग कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने,उन पर होने वाले किसी प्रकार के शोषण, भेदभाव, घरेलू हिंसा या अपराध को रोकने के लिए संस्था काम करेगी। युवाओं के लिए ‘उत्तराखंड जन विकाससहकारी समिति’ हर स्तर पर काम करेगी ताकि वह अपने रोजगार के लिए पहाड़ न छोड़े। युवाओं के लिए उत्तराखंड में रोजगार, शिक्षा,तकनीकी शिक्षा या उन सभी संभावनाओं को देखते हुये मदद की जायेगीताकि वह अपने संसाधनों से ही यहां अपनी आजीववका चला सके।

7. सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं भाषा के संरक्षण की पहल

‘उत्तराखंड बचाओ आंदोलन’सांस्कृतिक धरोहर की अक्षुण्णिता के लिएप्रतिबद्ध है। संस्था समय-समय पर थीम आधारित सांस्कृतिक आयोजन करेगी। इसमें गीत-संगीत, भाषा-साहित्य, फिल्म-रंगमंच, लोक कलाओ के सरंक्षण और संवर्धन को केंद्र में रखा जायेगा। संस्कतिकमियों की समस्याओं को सुलझाने और उनको प्रोत्साहन के लिए कदम जायेंगे। उत्तराखंड के साकहित्य और भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए भी प्रयास किये जायेंगे। इसके लिए समय-समय पर साहित्या-भाषा की गोष्ठियों, सेमिनारों, कवि सम्मेलनों का आयोजन किया जायेगा। आर्थिक रूप से कमजोर लखेकों, कवियों, भाषाविदों, रंगकमियों, कलाकारों की पुस्तकों, सीडी, डॉक्यूमेंटरी के लिए मदद की जायेगी। बुजुर्ग रचनाधमियाँ के लिए जो भी व्यवस्था हो पाएगी उसे उपलअब्धि कराने के प्रयाससंस्था करेगी। गांवों में अपनी विरासत को बचाये रखने वाले लोक कलाकारों, ढोल-दमाऊं वादकों,रणसिंह बजाने वालों, छोलिया नृत्य करने वालों, हुड़किया बोल गाने वालों, बादियाँ, हुड़किया समाज, शकुनाखर गाने वाले, झोड़ा-चांचरी, न्यौली, बैर, जगरिया जैसे लोककमियाँ की समस्याओं के समाधान और उन्हें सम्मान देने की व्यवस्था की जायेगी।

8. समसामयिक मुद्दे

‘उत्तराखंड जन विकाससहकारी समिति’उत्तराखंड के उन सभी समसामयिक मुद्दों पर भी काम करेगी जो वहां समय-समय पर उठते रहते हैं। बहुत सारे मुद्दे ऐसे हैं जो राज्य आन्दोलान के थे, लेकिन राज्य बनने के बीस साल बाद भी नहीं सुलझे। इनके लिएभी एक समाजिक दबाव सरकारों पर बनाने का काम संस्था करेगी। इनमें कुछ मुद्दे बहुतअहम हैं।

  1. उत्तराखंड में लोकसभा और बिधानसभाओं का परिसीमन जनसंख्या नहीं बल्कि भोगलिक परिस्थिति के आधार पर होना चाहिए|
  2. उत्तराखंड में स्थाई निवास की तिथि सविधान के अनुसार 1950 होनी चादहये।
  3. उत्तराखंड की भोगलिक परिस्थितिको देखते हुए यहां के जिलों की मांग को माना जाये। राज्य में कम से कम 23 जिले होने चाहिए।
  4. गेरसेण और उत्तराखंड की स्थाई राजधानी घोषित किया जाये।
  5. सरकारी और निजी क्षेत्र में पहाड़ी क्षेत्र के लोगों के लिए नौकरियो में 70% आरक्षण, राज्य के समूह ‘ग’ और अन्य सेवाओं में आवश्यक रूप से स्थानीय लोगों को रोजगार दिया जाना चाहिए। ।
  6. बड़ी विकास परियोजनाओं की बजाय छोटी-छोटीपरियोजनाओं को बनाकर उन्हें सहकारिता के आधार पर चलाने की व्यवस्था हो।
  7. राज्य का अपना सशक्त ‘पंचायती राज व्यवस्था कायम हो।
  8. उत्तराखंड राज्य आन्दोलान मे मुजफ्फरनगर, खटीम और मसूरी में हुये नर संहार की जाचं के लिए आयोग का गठन होना चाहिए।
  9. सरकारी स्कूलों को बदं करने और आस्पतालों को पीपीपी मोड पर देने की नीति बंद हो।
  10. दूरसंचार कनेक्टिविटी और अन्य आधुनिक बुनियादी ढांचे आदि के लिए काम करने के लिए प्रतिबद्ध है, इसके लिए ‘उत्तराखंड जन विकास सहकारी सहमिति’ हर उत्तराखंड से अनुरोध करत़ी है की वह आगे आए और हमारे साथ जुडे।